आज पूरी दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ ऊर्जा की बढ़ती ज़रूरत और पर्यावरण की सुरक्षा दोनों साथ-साथ हमारे सामने चुनौती बनकर खड़ी हैं। हर देश विकास चाहता है, उद्योग आगे बढ़ाना चाहता है, लोगों तक बेहतर सुविधाएँ पहुँचाना चाहता है लेकिन इसके साथ यह सवाल भी पहले से ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गया है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हम कैसी धरती छोड़कर जा रहे हैं। इसी वजह से नवीकरणीय ऊर्जा अब सिर्फ़ एक चर्चा नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा बन चुकी है।
The Founder’s Dream podcast के में जब Necon Renewable Energy की प्रबंध निदेशक झिलमिल मल्होत्रा ने इस विषय पर अपने अनुभव साझा किए, तो बात सिर्फ़ कारोबार तक सीमित नहीं रही। यह बातचीत इस बात पर भी थी कि भारत ऊर्जा के क्षेत्र में किस दिशा में बढ़ रहा है, चुनौतियाँ कहाँ हैं और आने वाले वर्षों में सबसे बड़े अवसर क्या बनने वाले हैं।
झिलमिल मल्होत्रा की सोच और Necon की यात्रा
झिलमिल मल्होत्रा उन लोगों में हैं जो नवीकरणीय ऊर्जा को केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा विषय मानती हैं। Necon Renewable Energy के साथ उनका काम एक स्पष्ट सोच पर आधारित है, ऐसी ऊर्जा व्यवस्था तैयार करना जो भरोसेमंद भी हो, टिकाऊ भी हो और लंबे समय तक लोगों को फायदा भी दे।
उनका मानना है कि भारत जैसे बड़े देश में ऊर्जा की माँग लगातार बढ़ेगी, इसलिए सिर्फ़ पारंपरिक संसाधनों पर निर्भर रहना आगे चलकर मुश्किल पैदा कर सकता है। यही वजह है कि Necon ने सौर और पवन ऊर्जा दोनों पर साथ काम करने की दिशा चुनी। कंपनी का उद्देश्य सिर्फ़ बिजली बनाना नहीं, बल्कि ऐसा मॉडल तैयार करना है जो उद्योगों, व्यवसायों और आम लोगों के लिए लंबे समय तक उपयोगी साबित हो।
बातचीत के दौरान झिलमिल ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में सबसे ज़्यादा ज़रूरी है भरोसा। लोग नई तकनीक को तभी अपनाते हैं जब उन्हें उसके परिणाम साफ़ दिखते हैं। इसलिए उनका पूरा ध्यान ऐसे समाधान तैयार करने पर है जो व्यावहारिक हों और जमीन पर असर दिखाएँ।
संयुक्त ऊर्जा मॉडल क्यों महत्वपूर्ण है
Necon Renewable Energy का सबसे खास काम सौर और पवन ऊर्जा को साथ जोड़कर देखना है। दिन के समय सूरज से मिलने वाली ऊर्जा और रात में हवा से मिलने वाली ऊर्जा ; दोनों मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाती हैं जो लगातार बिजली उपलब्ध करा सके। झिलमिल मल्होत्रा के मुताबिक यही आने वाले समय की सबसे व्यावहारिक दिशा है। सिर्फ़ एक स्रोत पर निर्भर रहने की जगह अगर अलग-अलग स्रोतों को साथ लाया जाए, तो ऊर्जा की उपलब्धता बेहतर होती है और खर्च पर भी नियंत्रण आता है।
उनकी टीम तकनीकी स्तर पर भी लगातार नए प्रयोग कर रही है। लक्ष्य साफ़ है ; ऐसी ऊर्जा व्यवस्था तैयार करना जो किफायती हो, लगातार काम करे और भारत की ज़रूरतों के हिसाब से विकसित हो।
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौतियाँ
बातचीत के दौरान एक अहम विषय चुनौतियों का भी रहा। झिलमिल ने साफ़ कहा कि अवसर जितने बड़े हैं, रास्ता उतना आसान नहीं है।
सबसे पहली चुनौती शुरुआती निवेश की है। बहुत से लोग और छोटे व्यवसाय इस क्षेत्र में दिलचस्पी रखते हैं, लेकिन शुरुआत में लगने वाली लागत उन्हें रोक देती है। इसके अलावा ऊर्जा भंडारण की तकनीक अभी भी महंगी है।
दूसरी चुनौती बुनियादी ढांचे की है। कई जगह अभी भी बिजली वितरण और तकनीकी व्यवस्था को बेहतर बनाने की ज़रूरत है। कुछ क्षेत्रों में जगह और अनुमति से जुड़ी बाधाएँ भी सामने आती हैं। लेकिन सबसे दिलचस्प बात उन्होंने लोगों की सोच को लेकर कही। उनका मानना है कि जब तक लोग इसे केवल खर्च मानेंगे, तब तक बदलाव धीमा रहेगा। जिस दिन इसे भविष्य के निवेश की तरह देखा जाने लगेगा, तस्वीर तेज़ी से बदल जाएगी।
भारत का आने वाला समय
झिलमिल मल्होत्रा भारत के भविष्य को लेकर बेहद आशावादी नज़र आती हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।
सरकारी स्तर पर घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है। तकनीक बेहतर हो रही है। कंपनियाँ शोध और नए समाधान पर काम कर रही हैं। और सबसे अच्छी बात यह है कि लोगों के बीच जागरूकता भी बढ़ रही है। उनके मुताबिक आने वाले दशक में भारत सिर्फ़ ऊर्जा का बड़ा उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि इस क्षेत्र में नई तकनीक और बड़े समाधान देने वाला देश भी बन सकता है।
नवीकरणीय ऊर्जा कोई एक दिन का बदलाव नहीं है।
इस पूरी बातचीत की सबसे अच्छी बात यह रही कि इसमें भविष्य की बड़ी बातें थीं, लेकिन ज़मीन से जुड़ी सच्चाई भी थी।
झिलमिल मल्होत्रा ने साफ़ कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा कोई एक दिन का बदलाव नहीं है। इसमें धैर्य चाहिए, लगातार काम चाहिए और दूर की सोच चाहिए।
इस बातचीत से मेरी यह समझ और साफ़ हुई कि ऊर्जा का विषय सिर्फ़ उद्योग का विषय नहीं है ; यह हर उस व्यक्ति से जुड़ा है जो आने वाले भारत को बेहतर देखना चाहता है। और शायद यही इस बातचीत की सबसे बड़ी बात है, नवीकरणीय ऊर्जा सिर्फ़ बिजली की कहानी नहीं, बल्कि आने वाले भारत की कहानी है।
Necon Renewable Energy की प्रबंध निदेशक झिलमिल मल्होत्रा के साथ यह बातचीत एक जरूरी याद दिलाती है कि भविष्य की तैयारी आज के फैसलों से होती है। भारत के पास अवसर भी है, ज़रूरत भी है और क्षमता भी। ऐसे में अगर तकनीक, सही सोच और मजबूत नेतृत्व साथ आएँ, तो नवीकरणीय ऊर्जा देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
और इसी बदलाव की दिशा में झिलमिल मल्होत्रा जैसे लोग काम कर रहे हैं। शांत तरीके से, लगातार और भविष्य के निर्माण के लिए।
झिलमिल मल्होत्रा के साथ पूरा पॉडकास्ट यहाँ देखिए :-